उत्तराखंड के पहाड़ों में चकबंदी और भूमि समतलीकरण: पलायन रोकने का क्रांतिकारी रोडमैप
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि का विकास और पलायन (Migration) की गंभीर समस्या दो ऐसे पहलू हैं जो आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। पहाड़ों में विषम भौगोलिक परिस्थितियों, छोटे व बिखरे हुए सीढ़ीदार खेतों और सिंचाई व कनेक्टिविटी की कमी के कारण खेती अब अधिकांश किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं रह गई है।
इस स्थिति को बदलने और पलायन रोकने के लिए आधुनिक चकबंदी (Consolidation of Land Holdings) और भूमि समतलीकरण (Land Leveling & Reclamation) एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
1. समस्या की जड़: बिखरे सीढ़ीदार खेत और पलायन
उत्तराखंड के पर्वतीय गाँवों में आज भी पारंपरिक कृषि सीढ़ीदार खेतों पर निर्भर है। हालाँकि, इन खेतों की सबसे बड़ी चुनौती इनका अत्यधिक छोटा होना और अलग-अलग जगहों पर बिखरा होना है।
* श्रम की अधिकता, पैदावार कम: एक किसान के पास यदि 5 से 10 नाली जमीन है, तो वह 4 से 5 अलग-अलग पहाड़ियों पर बिखरी हुई है। इससे किसान का समय और ऊर्जा एक खेत से दूसरे खेत तक जाने में ही नष्ट हो जाते हैं।
* आधुनिक उपकरणों का अभाव: बिखरे और छोटे खेतों में आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करना संभव नहीं हो पाता।
* लागत में वृद्धि: श्रम अधिक लगने से कृषि की लागत बढ़ जाती है, जिससे निराश होकर युवा शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
2. चकबंदी और भारी मशीनरियों (JCB/बुलडोजर) से समतलीकरण
पहाड़ों में खेती को टिकाऊ और आकर्षक बनाने के लिए पारंपरिक तरीके से हटकर मशीनरियों और बुनियादी ढाँचे में बड़े बदलाव की आवश्यकता है।
बिखरे खेतों को एक जगह समेकित करना (चकबंदी)
सरकार को राज्य स्तर पर एक विशेष नीति बनाकर पहाड़ी गाँवों में स्वैच्छिक व पारदर्शी चकबंदी लागू करनी चाहिए। किसी किसान की अलग-अलग जगह स्थित भूमि का सही मूल्यांकन करके उसे गाँव के एक ही हिस्से में एकमुश्त (बड़ा चक) जमीन दी जानी चाहिए।
जेसीबी और बुलडोजर से मैदानी खेतों का निर्माण
अनेकों छोटे और संकरे सीढ़ीदार खेतों को मिलाकर जेसीबी और बुलडोजर की मदद से एक बड़े समतल खेत (Plains/Bigger Terraces) में बदला जा सकता है। ढलानों को वैज्ञानिक तरीके से काट कर और रीटेनिंग वॉल (Retaining Walls) बनाकर 10-15 छोटे खेतों को मिलाकर एक बड़ा मैदान तैयार किया जा सकता है।
हर गाँव और खेत तक कृषि सड़क (Farm Connectivity)
समतलीकरण के साथ-साथ हर गाँव और चकबंदी क्षेत्र तक लिंक रोड का निर्माण आवश्यक है। इससे जेसीबी, ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरण आसानी से खेतों तक पहुँच सकेंगे और फसलों को सीधे मंडी तक पहुँचाना आसान हो जाएगा।
3. इस मॉडल से पलायन रोकने में कैसे मिलेगी मदद?
* व्यावसायिक और आधुनिक कृषि: जब खेत समतल और एक स्थान पर होंगे, तो किसान वहाँ High-Density Orchards, पॉलीहाउस, कीवी, सेब, ड्रैगन फ्रूट और सब्जियां आसानी से उगा सकेंगे।
* लागत और समय की बचत: मशीनों के प्रयोग से शारीरिक श्रम 70-80% तक घट जाएगा और उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
* युवाओं के लिए स्वरोजगार: खेती में तकनीक और सुगमता दिखने पर पहाड़ी युवा गाँव में ही एग्री-स्टार्टअप (Agri-Startups) शुरू करेंगे।
* सामूहिक और सहकारी खेती: बड़े व समतल खेतों पर गाँव के लोग मिलकर क्लस्टर फार्मिंग कर सकते हैं, जिससे प्रोसेसिंग और पैकेजिंग गाँव के स्तर पर ही संभव हो सकेगी।
निष्कर्ष
उत्तराखंड के पहाड़ी गाँवों का अस्तित्व तभी बचाया जा सकता है जब वहाँ के खेतों को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाया जाए। जेसीबी/बुलडोजर द्वारा भूमि समतलीकरण, व्यापक चकबंदी और हर गाँव में सड़कों का विस्तार ही वह रोडमैप है जो उत्तराखंड में कृषि की तस्वीर बदल सकता है और पलायन पर स्थायी ब्रेक लगा सकता है।



