उत्तराखंड: पहाड़ का प्रेम खींच लाया वापस, महेंद्र बिष्ट ने पांच कार्यालय खोलकर 400 से अधिक युवाओं को दिया रोजगार



अल्मोड़ा/उत्तराखंड। बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में पहाड़ से निकले महेंद्र बिष्ट ने सफलता हासिल करने के बाद अपनी जड़ों की ओर लौटने का फैसला किया। उन्होंने उत्तराखंड के अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों में पांच बैकएंड कार्यालय स्थापित कर 400 से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं। उनकी यह पहल पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और पलायन की समस्या को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।

नोएडा से शुरू हुआ करियर, अब पहाड़ में रोजगार का अवसर



महेंद्र बिष्ट ने अपने करियर की शुरुआत नोएडा में एक चैनल से की थी। शुरुआती दौर में उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन पहाड़ से जुड़ाव और अपने क्षेत्र के लिए कुछ करने की इच्छा उनके मन में बनी रही। धीरे-धीरे उन्होंने अपने मित्र डी. विजयन के साथ मिलकर एडमास बैकएंड सर्विस नाम की कंपनी स्थापित की और विभिन्न राज्यों में अपना कामकाज बढ़ाया।

महेंद्र के अनुसार, उनकी कंपनी से वर्तमान में देशभर में 1,600 से अधिक युवा रोजगार से जुड़े हुए हैं। पहाड़ के प्रति अपने लगाव के चलते उन्होंने उत्तराखंड लौटकर यहां भी रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया।

12वीं पास युवाओं को भी मिल रहा रोजगार



कंपनी के माध्यम से स्थानीय युवाओं को डेटा एंट्री, कॉल सेंटर और अन्य बैकएंड सेवाओं से जुड़े काम दिए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इन अवसरों के लिए केवल उच्च शैक्षणिक योग्यता वाले युवाओं तक ही सीमित नहीं रहा गया है। 12वीं पास युवा भी अपनी योग्यता और कौशल के अनुसार रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।

महेंद्र बिष्ट के मुताबिक, कई युवा नौकरी के साथ-साथ अपनी आगे की पढ़ाई भी जारी रख रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ अपनी शिक्षा पूरी करने में भी मदद मिल रही है।

कंपनी को एक अमेरिकी कंपनी से डेटा एंट्री का काम मिलता है। इसके अलावा, विभिन्न कंपनियों के कॉल सेंटर से संबंधित कार्य भी किए जाते हैं। युवाओं की क्षमता और कौशल को ध्यान में रखते हुए उन्हें जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं।

पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और चंपावत में पांच कार्यालय



पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से कंपनी ने अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों में पांच कार्यालय स्थापित किए हैं। इन कार्यालयों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को अपने घर और परिवार के नजदीक रहकर काम करने का अवसर मिल रहा है।

स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से युवाओं को नौकरी के लिए बड़े शहरों की ओर जाने की मजबूरी कम करने में मदद मिल सकती है। इससे पहाड़ के परिवारों को आर्थिक सहारा मिलने के साथ क्षेत्र की प्रतिभा का उपयोग स्थानीय विकास में भी हो सकता है।

सीमांत क्षेत्रों में तकनीकी रोजगार की चुनौतियां



पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों में तकनीकी रोजगार का विस्तार करना आसान नहीं है। महेंद्र बिष्ट ने बताया कि कई दूरस्थ इलाकों में डिजिटल कनेक्टिविटी, इंटरनेट की गुणवत्ता और लीज लाइन जैसी आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण कामकाज में चुनौतियां आती हैं।

उन्होंने कहा कि बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी और आवश्यक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध होने पर इस पहल को और आगे बढ़ाया जा सकता है। विशेष रूप से लीज लाइन जैसी सुविधा मिलने से कंपनी की कार्यक्षमता बढ़ने और अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

पलायन रोकने की दिशा में उम्मीद की पहल



उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण बड़ी संख्या में युवा दूसरे शहरों की ओर रुख करते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर डेटा एंट्री, कॉल सेंटर और डिजिटल सेवाओं से जुड़े रोजगार विकसित करना एक वैकल्पिक रास्ता बन सकता है।

महेंद्र बिष्ट की पहल यह दिखाती है कि तकनीक और डिजिटल सेवाओं के माध्यम से पहाड़ में रहकर भी रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, इस मॉडल को व्यापक स्तर पर सफल बनाने के लिए बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी ढांचे और कौशल विकास पर ध्यान देना जरूरी होगा।

पहाड़ से जुड़ाव और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का यह प्रयास उत्तराखंड में स्वरोजगार तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास की संभावनाओं को सामने लाता है।